2027 से पहले अखिलेश का बड़ा दांव! BJP के मजबूत लोधी वोटबैंक पर नजर, PDA प्लान से सेंधमारी की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी रणनीति तेज हो गई है। अखिलेश यादव अब बीजेपी के पारंपरिक लोधी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने वीरांगना अवंती बाई लोधी की जयंती पर उनकी भव्य प्रतिमा लगाने और सत्ता में आने पर 16 अगस्त को शासकीय अवकाश घोषित करने का ऐलान किया। सपा इस रणनीति को अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को और व्यापक बनाने की कोशिश के तौर पर देख रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से तेज हो गई है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी अपने-अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटी हैं। इसी कड़ी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अब लोधी समाज को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर जोर देना शुरू किया है।
लोधी समाज को लंबे समय से बीजेपी के मजबूत ओबीसी वोटबैंक में गिना जाता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के राजनीतिक प्रभाव ने इस समुदाय को बीजेपी के साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में सपा की नजर इस वोटबैंक पर जाना यूपी की चुनावी रणनीति में अहम बदलाव माना जा रहा है।
अवंती बाई लोधी के बहाने बड़ा संदेश
अखिलेश यादव ने वीरांगना अवंती बाई लोधी की जयंती के मौके पर लोधी समाज के सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने दो बड़े ऐलान किए।
पहला, लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट पर अवंती बाई लोधी की सोने की तलवार के साथ भव्य प्रतिमा स्थापित करने की बात कही गई।
दूसरा, सपा की सरकार बनने पर 16 अगस्त को अवंती बाई लोधी की जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित करने का वादा किया गया।
इन ऐलानों को सिर्फ सम्मान की राजनीति के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले लोधी मतदाताओं तक सियासी संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
BJP के लिए क्यों अहम है लोधी वोट?
लोधी समुदाय उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में चुनावी तौर पर प्रभावशाली माना जाता है। खासकर रुहेलखंड, ब्रज और बुंदेलखंड समेत कई क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
कल्याण सिंह के दौर में यह समुदाय बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ा। बाद में बीजेपी ने लोधी समाज के नेताओं को संगठन और सरकार में प्रतिनिधित्व देकर इस सामाजिक आधार को बनाए रखने की कोशिश की।
अब सपा इसी मजबूत आधार में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
PDA को और बड़ा करने की कोशिश
अखिलेश यादव की रणनीति सिर्फ लोधी समाज तक सीमित नहीं है। सपा अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को लगातार विस्तार देने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश ने कार्यकर्ताओं से एक-एक वोट जोड़ने पर जोर देते हुए सभी सामाजिक वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कही है। लोधी समाज को साधने की कोशिश इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
बीजेपी भी हुई सतर्क
सपा के इस कदम के बीच बीजेपी के सामने अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। पार्टी कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को याद करने के साथ-साथ लोधी समाज के मौजूदा नेताओं के जरिए अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
यानी 2027 से पहले यूपी की राजनीति में मुकाबला सिर्फ मुद्दों और नारों का नहीं, बल्कि वोटबैंक और सामाजिक समीकरणों की नई गोलबंदी का भी होता दिखाई दे रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव लोधी समाज में बीजेपी की पकड़ को वास्तव में कमजोर कर पाएंगे, या बीजेपी अपने पुराने सामाजिक समीकरण को फिर से मजबूत करने में कामयाब होगी?
2027 के चुनाव तक यह सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।
