मौसम व आपदा

अल-नीनो का असर बढ़ेगा? संसद में सरकार ने बताया- कम बारिश और सूखे से निपटने की क्या है तैयारी

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) 2026 में विकसित हो रही अल-नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। सरकार के अनुसार, सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए पहले ही पूर्वानुमान जारी कर दिया गया था और संबंधित मंत्रालयों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

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सद में उठा अल-नीनो और कम बारिश का मुद्दा

लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि 2026 के मानसून सीजन के दौरान अल-नीनो (El Niño) की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, अल-नीनो का असर हर बार एक जैसा नहीं होता, लेकिन कई बार इसकी वजह से मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

IMD ने पहले ही जारी कर दिया था पूर्वानुमान

सरकार ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अप्रैल 2026 में जारी अपने पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान में मानसून को सामान्य से कम रहने की संभावना जताई थी। बाद में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में बारिश का अनुमान और घटाकर 90 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) कर दिया गया।

सरकार का कहना है कि समय रहते अलर्ट जारी करने का उद्देश्य राज्यों और संबंधित एजेंसियों को पहले से तैयारी का अवसर देना था।

कितना असर डाल चुका है अल-नीनो?

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, 1950 के बाद 16 बार अल-नीनो की स्थिति दर्ज की गई है। इनमें से 7 वर्षों में मानसून पर स्पष्ट प्रभाव देखने को मिला और देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हुई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सितंबर के दौरान अल-नीनो का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है।

सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?

सरकार ने संसद में बताया कि IMD रोजाना बारिश और मौसम से जुड़ी जानकारी जारी करता है। इसके अलावा—

हर महीने अल-नीनो की स्थिति पर अपडेट जारी किया जाता है। जिला और ब्लॉक स्तर तक वर्षा संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ नियमित समीक्षा बैठकें होती हैं। किसानों के लिए साप्ताहिक मौसम और वर्षा पूर्वानुमान भी जारी किए जाते हैं। कृषि और जल प्रबंधन पर विशेष फोकस

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत कार्यरत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (IITM) कृषि, जल संसाधन और बांध प्रबंधन से जुड़े विभागों के साथ मिलकर मौसम के संभावित प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है।

इसका उद्देश्य समय रहते कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े फैसलों में सहायता करना है।

राज्यों के लिए क्या कहा?

सरकार ने स्पष्ट किया कि 2026 में अल-नीनो के प्रभाव को लेकर राज्यों के लिए कोई अलग जिला-स्तरीय गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। हालांकि IMD लगातार मौसम, भारी बारिश, हीटवेव और अन्य चरम मौसमी घटनाओं से जुड़ी चेतावनियां राज्य सरकारों और संबंधित एजेंसियों को भेज रहा है।

सरकार का कहना है कि अल-नीनो की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और मौसम से जुड़ी हर नई जानकारी राज्यों तक पहुंचाई जा रही है। हालांकि मानसून की वास्तविक स्थिति आने वाले हफ्तों में मौसम के बदलते पैटर्न पर निर्भर करेगी।

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