राजनीति

बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा दांव, BNP ने मिर्जा फखरुल को बनाया उम्मीदवार

बांग्लादेश की सत्तारूढ़ BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। 20 अगस्त को होने वाले चुनाव में उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि BNP के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत है।

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बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। राष्ट्रपति चुनाव 20 अगस्त को होना है।

BNP के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में हुई पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल की उम्मीदवारी को मंजूरी दी गई। उम्मीदवार बनाए जाने के बाद आलमगीर ने पार्टी महासचिव और स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया।

जीत लगभग तय क्यों मानी जा रही है?

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में BNP को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला था। ऐसे में मिर्जा फखरुल की राष्ट्रपति चुनाव में जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।

मिर्जा फखरुल निर्वाचित होते हैं तो वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति होंगे। वह लंबे समय से BNP के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के करीबी सहयोगियों में उनकी गिनती होती रही है।

विपक्ष ने भी उतारा उम्मीदवार

मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी ने भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने गठबंधन सहयोगी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया है। ओली अहमद अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं।

राष्ट्रपति के पास कितनी ताकत?

बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति मुख्य रूप से औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। हालांकि संविधान के तहत उनके पास प्रधानमंत्री और प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति समेत कुछ महत्वपूर्ण अधिकार हैं। राष्ट्रपति देश के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं, लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल आम तौर पर प्रधानमंत्री की सलाह पर किया जाता है।

मिर्जा फखरुल पेशे से अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में BNP में सक्रिय राजनीति शुरू की और बाद में कृषि तथा नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री के तौर पर भी काम किया। 2016 में वह BNP के औपचारिक महासचिव बने थे।

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