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भारत-थाईलैंड सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ शुरू, जवानों को दी जा रही मुय थाई की ट्रेनिंग

भारत और थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ शुरू हो गया है। इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं आतंकवाद विरोधी अभियानों और जंगल जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में ऑपरेशन की तैयारी कर रही हैं। जवानों को थाईलैंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट मुय थाई की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

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भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ शुरू हो गया है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए संयुक्त क्षमता को मजबूत करना है।

इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के जवान एक-दूसरे के साथ मिलकर अलग-अलग तरह की सैन्य गतिविधियों और ऑपरेशनल ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास के दौरान जवानों को ऐसे हालात के लिए तैयार किया जा रहा है, जिनमें उन्हें सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच अभियान चलाना पड़ सकता है।

क्या है ‘मैत्री-XV’?

‘मैत्री’ भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसका मकसद दोनों सेनाओं के बीच सहयोग और आपसी समझ को बेहतर बनाना है।

इस अभ्यास में सैनिक एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझते हैं और संयुक्त ऑपरेशन के दौरान संचार, योजना और रणनीति को बेहतर बनाने का अभ्यास करते हैं।

इस बार के अभ्यास में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। दोनों देशों के सैनिक मिलकर ऐसी परिस्थितियों का अभ्यास कर रहे हैं, जिनमें किसी इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना हो।

मुय थाई की ट्रेनिंग क्यों?

इस सैन्य अभ्यास की एक खास बात मुय थाई की ट्रेनिंग भी है।

मुय थाई थाईलैंड की प्रसिद्ध मार्शल आर्ट है। इसे ‘आर्ट ऑफ एट लिम्ब्स’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुक्कों, कोहनी, घुटनों और पैरों का इस्तेमाल किया जाता है।

सैन्य प्रशिक्षण के दौरान मुय थाई जैसी तकनीकों से जवानों को नजदीकी मुकाबले में शारीरिक नियंत्रण, संतुलन और आत्मरक्षा की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

इस ट्रेनिंग का मकसद सैनिकों को किसी खेल प्रतियोगिता के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि नजदीकी दूरी पर होने वाली परिस्थितियों में शरीर के संतुलन और प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना है।

जंगल में ऑपरेशन की तैयारी

अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक चुनौतीपूर्ण इलाकों में ऑपरेशन की तैयारी भी कर रहे हैं।

जंगल जैसे इलाकों में सैन्य अभियान सामान्य परिस्थितियों की तुलना में ज्यादा मुश्किल होते हैं। यहां सैनिकों को सीमित दृश्यता, कठिन रास्तों और अचानक बदलने वाली परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ता है।

ऐसे अभियानों में टीमवर्क और सही समय पर निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है। संयुक्त अभ्यास के जरिए दोनों देशों के जवान इन क्षमताओं को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं।

आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त तैयारी

‘मैत्री-XV’ में आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े कई पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दोनों देशों के सैनिकों को संयुक्त रूप से योजना बनाने, इलाके की निगरानी करने और किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में समन्वय के साथ कार्रवाई करने का अभ्यास कराया जा रहा है।

इस तरह के अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल समझ बढ़ती है और भविष्य में किसी संयुक्त अभियान या मानवीय सहायता जैसी स्थिति में बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।

भारत-थाईलैंड रक्षा संबंधों के लिए अहम

भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है। दोनों देशों के बीच होने वाला यह संयुक्त सैन्य अभ्यास इसी सहयोग को और मजबूत करने का माध्यम है।

ऐसे अभ्यासों से सैनिकों को विदेशी सेना के साथ काम करने का अनुभव मिलता है। साथ ही अलग-अलग रणनीतियों और प्रशिक्षण तकनीकों को समझने का मौका भी मिलता है।

‘मैत्री-XV’ के जरिए दोनों देश आतंकवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ सैन्य सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, इस अभ्यास में सिर्फ हथियारों और सैन्य रणनीति की ट्रेनिंग ही नहीं हो रही, बल्कि जवानों को शारीरिक फिटनेस, नजदीकी मुकाबले और कठिन इलाकों में संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता भी विकसित करने का मौका मिल रहा है।

मुय थाई की ट्रेनिंग इस अभ्यास को और खास बनाती है, क्योंकि इससे भारतीय और थाई सैनिकों को थाईलैंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट को सैन्य प्रशिक्षण के नजरिए से समझने का अवसर मिल रहा है।

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