बिहार में शिक्षक भर्ती के बाद भी क्यों नहीं थमा छात्रों का आंदोलन? तेजस्वी करेंगे राजभवन मार्च
बिहार में शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों की मांगें सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डोमिसाइल नीति, BPSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल हैं। इसी बीच तेजस्वी यादव ने छात्रों के समर्थन में राजभवन मार्च का ऐलान किया है।

बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का आंदोलन एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है। राज्य में शिक्षक भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीद थी कि छात्रों का विरोध शांत होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पटना के गर्दनीबाग में छात्रों और अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है। अब इस आंदोलन में राजनीतिक नेताओं की एंट्री ने इसे और बड़ा मुद्दा बना दिया है।
शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन आया, फिर भी प्रदर्शन जारी
बिहार में शिक्षक भर्ती के लिए हजारों पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया गया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी दूसरी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
छात्रों का कहना है कि समस्या सिर्फ एक भर्ती परीक्षा की नहीं है। उनका मुद्दा बिहार में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
छात्रों की कई मांगें
प्रदर्शन के दौरान छात्र अलग-अलग मुद्दे उठा रहे हैं। इनमें बिहार में डोमिसाइल नीति, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
इसके अलावा कुछ अभ्यर्थी 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर भी अपनी मांग सामने रख रहे हैं।
यानी आंदोलन का दायरा अब सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है।
तेजस्वी यादव करेंगे राजभवन मार्च
छात्र आंदोलन को अब विपक्ष का राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। RJD नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में राजभवन मार्च का ऐलान किया है।
इस मार्च के जरिए विपक्ष सरकार पर रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।
बिहार में नौकरी बड़ा चुनावी मुद्दा
बिहार में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में रोजगार, भर्ती परीक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं।
चुनावी माहौल में छात्रों और युवाओं की नाराजगी किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है।
आंदोलन में नेताओं की एंट्री से बदला माहौल
छात्रों के प्रदर्शन के बीच राजनीतिक नेताओं के पहुंचने से आंदोलन का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है।
विपक्ष इसे युवाओं की आवाज बता रहा है, जबकि सरकार के सामने चुनौती यह है कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ प्रदर्शनकारियों की दूसरी मांगों का भी जवाब दे।
सबसे बड़ा सवाल—आंदोलन आगे कितना बढ़ेगा?
अब नजर राजभवन मार्च पर है। अगर इसमें बड़ी संख्या में छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी शामिल होते हैं तो यह आंदोलन बिहार की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।
दूसरी तरफ, अगर सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर बातचीत या कोई ठोस कदम उठाती है तो आंदोलन को शांत करने की कोशिश सफल हो सकती है।
