राजनीति

FCRA संशोधन बिल पर मिजोरम CM की बड़ी मांग, बोले- JPC के पास भेजा जाए

FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्र सरकार से इसे Joint Parliamentary Committee के पास भेजने की मांग की है। बिल में विदेशी फंड पाने वाले संगठनों की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर नए प्रावधान प्रस्तावित हैं।

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नई दिल्ली: Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बहस तेज होती जा रही है। अब मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी चिंताएं केंद्र सरकार के सामने रखी हैं।

लालदुहोमा ने केंद्र से मांग की है कि FCRA संशोधन बिल को Joint Parliamentary Committee यानी JPC के पास भेजकर विस्तार से जांच कराई जाए। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर मिजोरम और वहां के सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की चिंताओं से अवगत कराया।

बिल में क्या है प्रस्ताव?

प्रस्तावित संशोधन का एक अहम हिस्सा विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-लाभकारी संगठनों की संपत्तियों से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बिल में ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव है जिसके तहत FCRA लाइसेंस रद्द होने या समाप्त होने की स्थिति में संबंधित संस्थाओं की विदेशी योगदान से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक नई अथॉरिटी की भूमिका हो सकती है।

इसी प्रावधान को लेकर मिजोरम समेत पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में चिंता जताई गई है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विदेशी फंड से चलने वाले कई संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े काम करते हैं। ऐसे में कानून के नए प्रावधानों का उनके काम पर असर पड़ सकता है।

अमित शाह से मिले लालदुहोमा

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर प्रस्तावित कानून पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखे। लालदुहोमा के मुताबिक, उन्होंने बिल को लेकर कई मुद्दे गृह मंत्री के सामने उठाए।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि प्रस्तावित कानून में retrospective effect नहीं होगा। यानी नए प्रावधानों को पिछली घटनाओं या पुराने लेन-देन पर लागू नहीं किया जाएगा।

12 अगस्त को संसद में हो सकती है चर्चा

FCRA Amendment Bill को लेकर संसद में चर्चा 12 अगस्त को होने की संभावना जताई गई है। लालदुहोमा ने भी बताया है कि बिल को इस तारीख के आसपास चर्चा के लिए लिया जा सकता है। हालांकि, 9 अगस्त की रिपोर्टों के मुताबिक यह बिल सोमवार के सरकारी एजेंडे में शामिल नहीं था।

ऐसे में आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।

मिजोरम सरकार और चर्च संगठनों की चिंता

मिजोरम में चर्च और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी प्रस्तावित संशोधन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि विदेशी योगदान से चलने वाली कई संस्थाएं राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े प्रोजेक्ट संचालित करती हैं।

इसी वजह से राज्य सरकार चाहती है कि बिल को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय इसके प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की जाए और सभी संबंधित पक्षों की चिंताओं पर विचार किया जाए।

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से retrospective application को लेकर आश्वासन सामने आया है, जबकि JPC को भेजने की मिजोरम CM की मांग पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर नजर बनी हुई है।

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