गोंडा में घाघरा का कहर! 5 गांव पानी में घिरे, 9 हजार लोग प्रभावित; नाव बनी सहारा
उत्तर प्रदेश के गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से तरबगंज क्षेत्र के पांच गांव बाढ़ की चपेट में हैं। नदी खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और लगभग 9 हजार लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई घरों और खेतों में पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों के लिए आने-जाने का प्रमुख साधन अब नाव रह गई है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और भोजन पहुंचाने के साथ 72 नावें तैनात करने की जानकारी दी है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। तरबगंज तहसील के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैलने के बाद लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। नदी एल्गिन ब्रिज के पास खतरे के निशान से लगभग 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
पांच गांवों में बाढ़ का असर
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर तरबगंज क्षेत्र के पांच गांवों में दिखाई दे रहा है। ऐली, गढ़ी और बहादुरपुर समेत प्रभावित गांवों में करीब 9 हजार लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
कई जगहों पर पानी घरों तक पहुंच चुका है। लोगों ने जरूरी सामान को ऊंचाई पर रखने के लिए तख्त और चारपाइयों का सहारा लिया है। कुछ परिवारों के लिए घर के भीतर सामान्य तरीके से रहना तक मुश्किल हो गया है।
खेतों में पानी, फसल को नुकसान
बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों के साथ खेतों तक भी पहुंच गया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
गांवों में रहने वाले लोगों के सामने सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। पानी से घिरे इलाकों में चारा जुटाना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो रहा है।
नाव के सहारे जिंदगी
बाढ़ प्रभावित गांवों में सड़क या सामान्य रास्तों से आवाजाही कठिन हो गई है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए नाव ही आने-जाने का प्रमुख साधन बन गई है।
जरूरी सामान लाने से लेकर गांव से बाहर निकलने तक कई कामों के लिए लोगों को नाव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और पशुओं को लेकर परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी मदद
बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि पानी बढ़ने के बाद उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने राहत और पशुओं के चारे की व्यवस्था को लेकर प्रशासन से मदद की मांग की है।
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित इलाकों में स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
प्रशासन ने 72 नावें लगाईं
प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। तरबगंज के एसडीएम प्रदीप कुमार सिंह के मुताबिक बाढ़ चौकियों को अलर्ट रखा गया है और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री तथा भोजन पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के आवागमन के लिए 72 नावें लगाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
घाघरा नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण गोंडा के प्रभावित गांवों में हालात पर नजर बनी हुई है। घरों और खेतों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं, जबकि प्रशासन राहत सामग्री और नावों के जरिए मदद पहुंचाने का दावा कर रहा है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि घाघरा का जलस्तर आगे बढ़ता है या इसमें कमी आती है। अगर पानी और बढ़ा तो प्रभावित गांवों में राहत और बचाव अभियान की जरूरत भी बढ़ सकती है।
Disclaimer: बाढ़ की स्थिति और प्रभावित लोगों की संख्या उपलब्ध प्रशासनिक/मीडिया जानकारी पर आधारित है। जलस्तर और प्रभावित क्षेत्र समय के साथ बदल सकते हैं।
