JPSC विवाद कैसे बना झारखंड का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन? जानिए पूरी टाइमलाइन और छात्रों की मांगें
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों से शुरू हुआ विरोध अब झारखंड के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल चुका है। रांची में हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भूख हड़ताल पर हैं और सरकार पर निष्पक्ष जांच व बातचीत का दबाव बढ़ गया है।

JPSC विवाद कैसे बन गया झारखंड का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल चुका है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गई है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पूरा विवाद उस समय तेज हुआ जब सोशल मीडिया पर एक कथित उत्तर-पत्र (Answer Sheet) वायरल हुआ। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे पहले से उठ रहे सवाल और तेज हो गए। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें हैं:
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच। CBI या न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। भविष्य की परीक्षाओं के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद व्यवस्था बनाई जाए। क्यों बढ़ा आंदोलन?
यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे कथित विवादों और देरी के कारण युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। इसी वजह से यह विरोध पूरे राज्य के छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
लगातार प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल भी बनाया गया है, जबकि यह मुद्दा झारखंड विधानसभा तक पहुंच चुका है और विपक्ष भी इस पर सरकार को घेर रहा है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं सरकार के सामने चुनौती है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्रों का भरोसा दोबारा कैसे बहाल किया जाए।
