राजनीति

‘कांग्रेस में 1937 से यही परंपरा...’ Vande Mataram विवाद पर शशि थरूर ने साफ किया पार्टी का रुख

वंदे मातरम को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा के मुताबिक राष्ट्रगान का एक अंतरा और वंदे मातरम के दो पद गाए जाते हैं और आगे भी यही व्यवस्था जारी रहेगी। कांग्रेस कार्यसमिति ने 1937 के अपने फैसले को दोहराते हुए पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो छंद गाने का निर्णय बरकरार रखा है।

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वंदे मातरम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। थरूर ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम को लेकर एक पुरानी परंपरा चली आ रही है और पार्टी आगे भी उसी का पालन करेगी। 

थरूर के मुताबिक, कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगान का एक अंतरा और वंदे मातरम के दो पद गाने की परंपरा लंबे समय से रही है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में यही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। 

दरअसल, यह विवाद तब तेज हुआ जब कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त 2026 को 1937 के अपने पुराने फैसले को दोहराते हुए पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने के रुख को बरकरार रखा। 

कांग्रेस का तर्क है कि यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा के अनुरूप है। कांग्रेस नेताओं ने इसे पार्टी के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक मुद्दा बताया है। 

वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के इस फैसले का जोरदार विरोध किया है। शनिवार को बीजेपी ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के रुख की आलोचना की और कहा कि वंदे मातरम के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बीजेपी ने इस मुद्दे पर देशभर में अभियान चलाने की बात भी कही है। 

इस तरह शशि थरूर का बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम अब सिर्फ सांस्कृतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बीजेपी-कांग्रेस के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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