राजनीति

खनिज बिल पर केंद्र से भिड़े हेमंत सोरेन, आंदोलन का ऐलान; राहुल गांधी से मांगा समर्थन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। सोरेन का आरोप है कि बिल से झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार प्रभावित होंगे। वहीं केंद्र का कहना है कि बिल प्रमुख खनिजों से जुड़ा है और राज्यों के छोटे खनिजों संबंधी अधिकार बरकरार रहेंगे।

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खनिज संसाधनों से जुड़े केंद्र सरकार के नए कानून को लेकर बड़ा विरोध जताया है। उन्होंने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 के खिलाफ राज्य में व्यापक आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।

हेमंत सोरेन का कहना है कि यह कानून झारखंड के खनिज संसाधनों और राज्य के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि संसद के दोनों सदनों में इस बिल को जल्दबाजी में पारित कराया गया।

सोरेन ने कहा कि झारखंड अपने खनिज संसाधनों को लेकर किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा है और राहुल गांधी से आंदोलन में साथ आने की अपील की है।

राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी

मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी केंद्र के खिलाफ आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। पार्टी की ओर से कहा गया है कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में ले जाया जाएगा। इसमें जन-जागरूकता अभियान, प्रदर्शन और जरूरत पड़ने पर आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

JMM का आरोप है कि नए कानून से राज्य को मिलने वाले खनिज राजस्व पर असर पड़ सकता है, जिससे विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित होंगे।

केंद्र सरकार का क्या कहना है?

दूसरी ओर, केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि MMDR Amendment Bill का संबंध major minerals से है और राज्यों के minor minerals पर मौजूदा अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र राज्यों के अधिकार छीनने की कोशिश नहीं कर रहा है।

Major minerals में कोयला और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं, जबकि minor minerals में रेत, बजरी और साधारण मिट्टी जैसे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिज आते हैं।

अब खनिज संसाधनों के अधिकार को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। हेमंत सोरेन के आंदोलन के ऐलान के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

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