समाज

लाल किले से PM मोदी के 10 बड़े संदेश: 2047 का विकसित भारत, AI, न्यूक्लियर पावर और 'दिमागी नक्सल' पर क्या बोले?

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 75 मिनट के भाषण में विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भरता, AI स्किलिंग, न्यूक्लियर पावर, क्रिटिकल मिनरल्स और नक्सलवाद जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार का विजन सामने रखा। पीएम के 'दिमागी नक्सल' बयान पर विपक्ष ने सवाल उठाए, वहीं वंदे मातरम् को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव भी तेज हो गया।

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत के अगले दो दशकों की दिशा को लेकर कई बड़े लक्ष्य सामने रखे। करीब 75 मिनट के भाषण में युवाओं को केंद्र में रखते हुए उन्होंने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यूक्लियर पावर, क्रिटिकल मिनरल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का विजन बताया।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना देश का बड़ा संकल्प है। इसके लिए केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार जरूरी होगा।

उन्होंने देशवासियों से इस लक्ष्य को केवल सरकारी योजना न मानकर राष्ट्रीय संकल्प के रूप में आगे बढ़ाने की अपील की।

युवाओं पर खास फोकस

पीएम मोदी के भाषण में युवाओं का विशेष स्थान रहा। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए शिक्षा, स्किल और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की बात कही।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई। सरकार का उद्देश्य बेहतर शिक्षकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़कर छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण तैयारी की सुविधा पहुंचाना है।

इसके अलावा अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य भी सामने रखा गया।

AI और टेक्नोलॉजी पर भारत की नजर

प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी।

यानी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाएगी। इसी वजह से सरकार ऊर्जा के अलग-अलग स्रोतों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

न्यूक्लियर पावर का बड़ा लक्ष्य

भारत ने 2047 तक न्यूक्लियर पावर क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य सामने रखा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पांच न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए न्यूक्लियर पावर को भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े निवेश, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और लंबी अवधि की योजना की जरूरत होगी।

आत्मनिर्भरता और Energy Security

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकटों ने यह दिखाया है कि किसी एक देश या क्षेत्र पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

इसीलिए भारत को पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर, दवाइयों, तकनीक और दूसरी रणनीतिक जरूरतों में अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।

सरकार का जोर ऐसे मॉडल पर है जिसमें भारत वैश्विक बाजार से जुड़ा भी रहे और जरूरी संसाधनों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर भी न हो।

Critical Minerals और Semiconductor

भविष्य की अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों की भूमिका बढ़ने वाली है। इन उद्योगों के लिए जरूरी Critical Minerals को लेकर भी भारत अपनी रणनीतिक क्षमता मजबूत करना चाहता है।

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी निर्माण को भारत की आर्थिक ताकत से जोड़ते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर जोर दिया।

दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत से क्यों नहीं?

प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों की वैश्विक भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि भारत की कंपनियां दुनिया की बड़ी कंपनियों की सूची में शीर्ष स्थान हासिल करें और भारतीय बैंक, फार्मा कंपनियां, ब्रांड तथा प्रोफेशनल सर्विस कंपनियां वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करें।

इसका उद्देश्य केवल भारत को बड़ा बाजार बनाना नहीं, बल्कि भारत से ऐसे वैश्विक संस्थान और कंपनियां तैयार करना है जो दुनिया में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

नक्सलवाद पर सरकार का दावा

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है।

उन्होंने सुरक्षा बलों के योगदान को याद करते हुए कहा कि जिन इलाकों में कभी हिंसा का प्रभाव था, वहां विकास और सामान्य जीवन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं की पहुंच भी महत्वपूर्ण होगी।

'दिमागी नक्सल' बयान पर विवाद

भाषण का एक हिस्सा राजनीतिक विवाद का कारण भी बना। प्रधानमंत्री ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के बाद अब वैचारिक स्तर पर मौजूद चुनौतियों से भी सतर्क रहने की जरूरत है।

कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने इस बयान पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोधियों के लिए पहले 'अर्बन नक्सल' और अब 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।

इस बयान ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

वंदे मातरम् पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने

स्वतंत्रता दिवस के दिन कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया।

बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने वंदे मातरम् के गायन को रोकने की कोशिश की। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गायन रोकने का कोई प्रयास नहीं हुआ था।

कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर था।

इस मुद्दे पर दोनों दलों की अलग-अलग व्याख्या सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

भाषण का बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में एक तरफ 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दिखाई दिया, तो दूसरी तरफ AI, ऊर्जा, न्यूक्लियर पावर, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर जोर रहा।

लेकिन इन बड़े लक्ष्यों की असली परीक्षा इनके क्रियान्वयन में होगी। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और तकनीकी क्षमता में लगातार सुधार करना होगा।

यानी लाल किले से सामने रखा गया विजन बड़ा है। अब आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन लक्ष्यों को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

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