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लखीसराय भगदड़ की असली वजह क्या थी? करंट की अफवाह से मची अफरा-तफरी, 7 की मौत

बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को हुई भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंदिर जाने वाले रास्ते पर बिजली का पोल गिरा था और उसमें करंट होने की अफवाह फैलने के बाद भीड़ में अचानक अफरा-तफरी मच गई। दो ट्रेनों के एक साथ रुकने से पहले ही भीड़ बढ़ी हुई थी। संकरे रास्ते, गर्मी और भारी भीड़ ने हालात को और बिगाड़ दिया। प्रशासन मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। Article

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बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

आखिर भगदड़ क्यों मची?

प्रारंभिक प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, हादसा अशोक धाम स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर हुआ। सावन के सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। इसी दौरान स्टेशन पर दो ट्रेनों के एक साथ रुकने से भीड़ और बढ़ गई।

इसी बीच रास्ते में गिरे बिजली के पोल को लेकर करंट फैलने की अफवाह भीड़ में तेजी से फैल गई। अफवाह के बाद श्रद्धालुओं में अचानक डर पैदा हुआ और लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे।

अचानक बढ़े भीड़ के दबाव से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

संकरा रास्ता और गर्मी ने बढ़ाई मुश्किल

हादसे के पीछे सिर्फ अफवाह ही नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं। भारी भीड़ के बीच रास्ता संकरा होने और गर्मी के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही थी।

अफरा-तफरी के दौरान कई श्रद्धालु अपना संतुलन खोकर गिर पड़े। इसके बाद पीछे से आ रही भीड़ का दबाव बढ़ता गया और कुछ लोग नीचे दब गए।

फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि घटना के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था कैसी थी और किन परिस्थितियों में हालात इतने बिगड़े।

अशोक धाम में पहले भी हो चुका है हादसा

अशोक धाम मंदिर में भगदड़ का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2019 में भी जलाभिषेक के दौरान अफवाह के बाद भगदड़ की स्थिति बनी थी।

उस समय पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की अफवाह फैलने के बाद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई थी। उस घटना में एक श्रद्धालु की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। अत्यधिक गर्मी को भी उस समय हादसे की एक प्रमुख वजह बताया गया था।

सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की संख्या

अशोक धाम, जिसे इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवरिया पहुंचते हैं।

इसी वजह से सोमवार जैसे विशेष दिनों में मंदिर और आसपास के रास्तों पर भीड़ काफी बढ़ जाती है।

अब 7 लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठ रहा है। क्या भारी भीड़ को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था थी? क्या अफवाह फैलने के बाद लोगों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल प्रशासन का फोकस घायलों के इलाज और स्थिति को सामान्य बनाए रखने पर है। घटना की विस्तृत जांच के बाद ही भगदड़ की पूरी वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

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