मानसून सत्र के बचे 3 दिन अहम, डीलिमिटेशन बिल पर सरकार के सामने कई विकल्प
संसद के मानसून सत्र के अब केवल तीन दिन बाकी हैं, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। डीलिमिटेशन और FCRA बिल को लेकर सरकार की रणनीति पर नजर है, जबकि छात्र प्रदर्शन पर चर्चा के बाद सियासी गतिरोध खत्म करने के लिए सहमति बनाने की कोशिश जारी है।

संसद के मानसून सत्र के अंतिम तीन दिन सरकार और विपक्ष के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार हंगामा देखने को मिला है। इसके चलते संसद की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई।
सरकार ने इस दौरान कुछ विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की, लेकिन FCRA और डीलिमिटेशन बिल को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को सत्र के बचे हुए समय में सदन में लाने की संभावना बनी हुई है।
संसद में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में संभावित समझौते या मुद्दों पर आपसी सहमति की चर्चा भी तेज है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सरकार ने छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्ष की चर्चा की मांग स्वीकार की है। इसके बाद सरकार की ओर से जवाब देने का रास्ता भी खुला है। हालांकि, अन्य लंबित मुद्दों और विधेयकों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।
डीलिमिटेशन बिल को लेकर सरकार के सामने अब सीमित समय में रणनीति तय करने की चुनौती है। वहीं FCRA बिल पर भी राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण हो सकती है। सत्र के अंतिम दिनों में सरकार किस विधेयक को प्राथमिकता देती है और विपक्ष के साथ किस तरह की सहमति बनती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
क्रक्स: मानसून सत्र के केवल तीन दिन बचे हैं और संसद में गतिरोध अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने छात्र प्रदर्शन पर चर्चा के लिए विपक्ष की मांग मानी है, लेकिन FCRA और डीलिमिटेशन बिल जैसे अहम विधेयकों को लेकर अंतिम रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।
