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Meta के एल्गोरिदम पर सरकार सख्त, प्रोपेगेंडा और Deepfake कंटेंट रोकने के लिए मांगा रोडमैप

भारत सरकार ने Meta से उसके एल्गोरिदम में सुधार और प्रोपेगेंडा, डीपफेक व भ्रामक कंटेंट पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विस्तृत अनुपालन (Compliance) रोडमैप मांगा है। सरकार चाहती है कि कंपनी बताए कि वह गलत सूचना, AI-जनित फर्जी सामग्री और अवैध कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए अपने सिस्टम में क्या बदलाव करेगी।

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भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta से उसके कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और मॉडरेशन सिस्टम को लेकर जवाब तलब किया है। सरकार ने कंपनी से एक विस्तृत Compliance Roadmap मांगा है, जिसमें यह बताया जाए कि वह प्रोपेगेंडा, डीपफेक, भ्रामक जानकारी और अन्य अवैध कंटेंट को रोकने के लिए क्या तकनीकी और नीतिगत कदम उठाएगी।

सरकार की क्या है चिंता?

सरकार का मानना है कि AI आधारित डीपफेक, फर्जी वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और भ्रामक पोस्ट तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे कंटेंट से लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और सामाजिक तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से Meta से उसके एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में सुधार का स्पष्ट खाका मांगा गया है।

रोडमैप में क्या बताना होगा?

सरकार चाहती है कि Meta यह स्पष्ट करे कि:

डीपफेक और AI-जनित फर्जी कंटेंट की पहचान कैसे की जाएगी। एल्गोरिदम भ्रामक या प्रोपेगेंडा सामग्री के प्रसार को कैसे सीमित करेगा। अवैध कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को कैसे तेज और प्रभावी बनाया जाएगा। भारतीय नियमों के अनुरूप भविष्य में कौन-कौन से तकनीकी सुधार किए जाएंगे। हालिया घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती

यह कदम ऐसे समय आया है जब Meta की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में प्लेटफॉर्म पर डीपफेक और अन्य संवेदनशील कंटेंट के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है, जिसके बाद जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

अब निगाहें Meta की ओर हैं कि वह सरकार के सामने किस तरह का रोडमैप पेश करती है। यदि प्रस्तावित सुधार लागू होते हैं, तो भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI-जनित और भ्रामक कंटेंट की निगरानी पहले से अधिक सख्त हो सकती है।

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