राजनीति

मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव के संकेत! वैष्णव को बड़ी जिम्मेदारी, गडकरी के मंत्रालय पर भी मंथन

बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद अब केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी बड़े फेरबदल की चर्चा है। संभावित बदलाव में नए और युवा चेहरों को जगह देने के साथ अश्विनी वैष्णव की भूमिका बढ़ाने और नितिन गडकरी के विभाग में बदलाव की अटकलें शामिल हैं।

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बीजेपी संगठन में नई टीम के गठन के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सियासी चर्चाओं के मुताबिक आने वाले समय में कैबिनेट का विस्तार या फेरबदल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

संभावित फेरबदल में नए और युवा चेहरों को सरकार में बड़ी भूमिका मिलने की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में करीब 16 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं। इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं और कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।

अश्विनी वैष्णव की बढ़ सकती है जिम्मेदारी

चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर सामने आ रहा है। फिलहाल उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं। राजनीतिक विश्लेषण में उनके कामकाज को देखते हुए उन्हें सरकार की शीर्ष टीम में और महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, अगर उन्हें नई जिम्मेदारी दी जाती है तो उनके मौजूदा विभागों में से कुछ का बंटवारा दूसरे मंत्रियों के बीच किया जा सकता है। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि कई मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी है।

नितिन गडकरी के विभाग में बदलाव की चर्चा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं काफी अहम हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की बात के बजाय उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना पर ज्यादा चर्चा है।

यानी संभावित फेरबदल में गडकरी को कोई अलग विभाग दिया जा सकता है या उनके मौजूदा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी दूसरे नेता को सौंपी जा सकती है। इसे फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।

चुनावी समीकरण भी होंगे अहम

संभावित कैबिनेट बदलाव को सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव भी इस पूरी कवायद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खास तौर पर उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी पार्टी की नजर हो सकती है। महिलाओं, युवाओं और नई पीढ़ी को मंत्रिमंडल में कितनी जगह मिलती है, यह भी संभावित विस्तार का अहम पहलू माना जा रहा है।

सहयोगी दलों को भी मिल सकती है जगह

चर्चाओं में बीजेपी के सहयोगी दलों की भूमिका भी सामने आई है। संभावित विस्तार में एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं को भी केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल कैबिनेट में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं और मौजूदा संख्या को देखते हुए नए चेहरों को शामिल करने की गुंजाइश बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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