नागपुर में 4 हजार युवाओं ने एक साथ बजाया ढोल-ताशा, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम
नागपुर में 4 हजार से ज्यादा युवाओं ने सामूहिक ढोल-ताशा वादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। कार्यक्रम में 585 ध्वजवाहकों समेत बड़ी संख्या में कलाकार शामिल हुए। इस भव्य आयोजन का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। आयोजन ने महाराष्ट्र की पारंपरिक संस्कृति और युवा शक्ति की शानदार झलक पेश की।

नागपुर में रविवार को महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा संस्कृति का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। 4 हजार से ज्यादा युवा कलाकारों ने एक साथ ढोल और ताशा बजाकर ऐसा आयोजन किया, जिसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
इस कार्यक्रम में विदर्भ के अलग-अलग शहरों से 200 से अधिक ढोल-ताशा पथक शामिल हुए। आयोजन की खास बात यह रही कि 585 ध्वजवाहकों ने अपने-अपने दलों के साथ कार्यक्रम का नेतृत्व किया। हजारों कलाकारों के एक साथ वादन से पूरा आयोजन स्थल ढोल-ताशे की गूंज से भर गया।
कार्यक्रम को युवाओं और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा के संगम के तौर पर भी देखा गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में युवाओं के साथ संवाद भी किया गया। उन्होंने ढोल-ताशा परंपरा को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक ऊर्जा से जोड़ते हुए युवाओं के उत्साह की सराहना की।
रिकॉर्ड की प्रक्रिया के दौरान एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर पूरे कार्यक्रम का निरीक्षण किया। आयोजन पूरा होने के बाद रिकॉर्ड से जुड़ा प्रमाण पत्र भी आयोजकों को सौंपा गया।
नागपुर में हुए इस आयोजन ने एक तरफ महाराष्ट्र की पारंपरिक कला को बड़े मंच पर प्रदर्शित किया, वहीं बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने में रुचि रखती है।
