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NTA को खत्म नहीं, मजबूत करने की जरूरत! पूर्व UGC चीफ ने बताया परीक्षा सुधार का पूरा प्लान

पूर्व UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार का कहना है कि NTA को खत्म करने के बजाय उसकी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक परीक्षा सुरक्षा को सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि सवाल तैयार करने से लेकर स्टोरेज, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, परीक्षा केंद्र और रिजल्ट तक पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना जरूरी है। उन्होंने डिजिटल ट्रेसबिलिटी, सीमित एक्सेस, स्वतंत्र जांच और स्थायी विशेषज्ञ टीम जैसे उपायों पर जोर दिया।

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NTA को खत्म करने की बजाय उसकी व्यवस्था में गहरे स्तर पर सुधार करने की जरूरत है। पूर्व UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने कहा है कि परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को केवल पेपर लीक की समस्या मानना सही नहीं होगा। इसके लिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना जरूरी है।

कुमार के मुताबिक, सवाल तैयार करने से लेकर उनके अनुवाद, समीक्षा, डिजिटल स्टोरेज, प्रिंटिंग या ट्रांसमिशन, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और निगरानी की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। हर चरण में यह पता चल सके कि संवेदनशील सामग्री तक किसने पहुंच बनाई और कब बनाई, इसके लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी और सख्त एक्सेस कंट्रोल जरूरी है।

उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञों की स्थायी टीम तैयार करने पर भी जोर दिया। इसमें टेस्ट डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी, भाषा, क्वालिटी कंट्रोल, लॉजिस्टिक्स और वेंडर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि NTA को एक प्रोफेशनल और मिशन-क्रिटिकल संस्था के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।

कुमार ने यह भी कहा कि NTA का काम सिर्फ परीक्षा आयोजित करने तक सीमित रखते हुए संबंधित मंत्रालयों, नियामकों और संस्थानों को सिलेबस, विषय विशेषज्ञों और प्रश्नों की अकादमिक गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं NTA सुरक्षित प्लेटफॉर्म, परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रोसेसिंग पर ध्यान दे सकता है।

हाल में NTA में करीब 600 विशेषज्ञों के रिफ्रेश, नए विशेषज्ञों को शामिल करने और प्रश्नपत्रों की चार-स्तरीय जांच जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। कुमार के अनुसार ये महत्वपूर्ण कदम हैं, लेकिन किसी एक बदलाव से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने अलग-अलग परीक्षाओं के लिए कई नई एजेंसियां बनाने के विचार से भी सावधान किया। उनके मुताबिक एक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था होने से सुरक्षा मानकों, तकनीक, उम्मीदवार सेवाओं और रिजल्ट प्रक्रिया में एकरूपता बनाए रखना आसान हो सकता है। इसलिए मौजूदा NTA को खत्म करने के बजाय उसकी कमियों को दूर कर संस्थागत रूप से मजबूत करना ज्यादा उपयोगी रास्ता हो सकता है।

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