राजनीति

परिसीमन पर विजय का बड़ा दांव, तमिलनाडु विधानसभा में 543 सीटें बरकरार रखने का प्रस्ताव

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर विधानसभा में विशेष प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखने की मांग की गई है। विजय सरकार का तर्क है कि आबादी के आधार पर परिसीमन होने पर दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। तमिलनाडु की मौजूदा लोकसभा में 39 सीटें हैं और राज्य सरकार इन्हें सुरक्षित रखने के पक्ष में है। इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। विजय की ओर से बुलाई गई सांसदों की बैठक में DMK और AIADMK के सांसद शामिल नहीं हुए थे, जबकि कांग्रेस, VCK और वाम दलों समेत कुछ अन्य दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया था।

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लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु में सियासी बहस तेज हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बनाए रखने से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। राज्य में इस मुद्दे को लेकर दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

परिसीमन का आधार मुख्य रूप से जनसंख्या से जुड़ा होने के कारण दक्षिणी राज्यों में आशंका है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें भविष्य में लोकसभा में सीटों के मामले में नुकसान हो सकता है। इसी वजह से तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्यों में इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा लगातार बढ़ रही है।

तमिलनाडु की मौजूदा लोकसभा में 39 सीटें हैं। राज्य में यह मांग उठ रही है कि परिसीमन के बाद सीटों की संख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ऐसा बदलाव नहीं होना चाहिए, जिससे राज्यों के बीच शक्ति संतुलन प्रभावित हो।

इस मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति में भी अलग-अलग रुख देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री विजय की ओर से परिसीमन को लेकर राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सभी प्रमुख दलों की भागीदारी को लेकर तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है।

परिसीमन का मुद्दा केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

वहीं, केंद्र सरकार के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिसीमन से जुड़े किसी भी फैसले का देश के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में 543 सीटों को बनाए रखने की मांग आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकती है।

क्रक्स: तमिलनाडु में परिसीमन के खिलाफ राजनीतिक आवाज तेज हो रही है। विधानसभा में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बनाए रखने का प्रस्ताव इस चिंता को सामने लाता है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। अब इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बनाना बड़ी चुनौती होगी।

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