प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम, बोले- युवाओं के पास दर्द, डेटा और दौलत की ताकत
प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं और Gen Z से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले असर को प्रमुख मुद्दा बताया। राहुल गांधी ने युवाओं की ताकत को ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के जरिए समझाया और कहा कि युवाओं के पास देश की अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता है।

प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’, राहुल गांधी ने युवाओं से की बात
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं की समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
युवाओं को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
राहुल गांधी ने कहा कि भारत के युवाओं में देश को बदलने की बड़ी क्षमता है। उन्होंने युवाओं की मौजूदा स्थिति और उनकी संभावनाओं को ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के तीन प्रमुख बिंदुओं से जोड़कर समझाया।
बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में अनियमितताओं और रोजगार के सीमित अवसरों का असर सीधे युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। AI के बढ़ते इस्तेमाल और उसके कारण रोजगार के अवसरों में आने वाले बदलावों पर भी उन्होंने चर्चा की।
झारखंड के छात्रों के मुद्दे का भी जिक्र
राहुल गांधी पहले ही झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने छात्रों के सवालों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई थी। इसी बीच प्रयागराज कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला और विरोधियों ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी को प्रयागराज के बजाय झारखंड जाना चाहिए था।
Gen Z पर राहुल का फोकस
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम युवाओं और खासकर Gen Z तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम में रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं की आर्थिक क्षमता जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।
‘दर्द, डेटा, दौलत’ बना चर्चा का विषय
प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘दर्द, डेटा, दौलत’ संदेश कार्यक्रम की प्रमुख बातों में रहा। उन्होंने युवाओं की समस्याओं को समझने के साथ-साथ उनके डेटा और आर्थिक शक्ति को भविष्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताया।
