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रेलवे का बड़ा विस्तार, 4 राज्यों में जुड़ेंगे 410 KM नए ट्रैक; ₹9,450 करोड़ की परियोजना से बदलेगी कनेक्टिविटी

केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब ₹9,450 करोड़ की लागत से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में लगभग 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित की जाएंगी।

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भारतीय रेलवे के नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चार राज्यों में रेलवे की क्षमता बढ़ाने वाली चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर करीब ₹9,450 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इनके जरिए लगभग 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क तैयार होगा।

इस योजना का असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु पर पड़ेगा। रेलवे का मानना है कि नए ट्रैक बनने से व्यस्त रेल रूटों पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और यात्री तथा मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकेगी।

किन रेल रूटों पर होगा काम?

प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत चार प्रमुख रेल सेक्शन को मजबूत किया जाएगा।

खड़गपुर-भद्रक: इस रूट पर करीब 173 किलोमीटर की चौथी लाइन जोड़ी जाएगी।

भद्रक-हरिदासपुर: लगभग 75 किलोमीटर के हिस्से में चौथी लाइन विकसित की जाएगी।

गुम्मिडिपूंडी-गुडूर: करीब 90 किलोमीटर के सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन का काम होगा।

कटक-पारादीप: लगभग 72 किलोमीटर के हिस्से में तीसरी और चौथी लाइन जोड़ी जाएगी।

इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी।

क्यों जरूरी हैं नई रेल लाइनें?

पूर्वी तट का यह रेल नेटवर्क देश की माल ढुलाई व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, कंटेनर और दूसरे औद्योगिक सामान की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है।

कई व्यस्त रूटों पर ट्रैक की क्षमता सीमित होने के कारण यात्री और मालगाड़ियों को रास्ता मिलने का इंतजार करना पड़ता है। अतिरिक्त ट्रैक बनने के बाद इस दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

नई लाइनें तैयार होने से ट्रेनों के संचालन में बेहतर फ्लेक्सिबिलिटी आएगी और व्यस्त सेक्शन पर रेल यातायात को अधिक कुशल तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।

60 लाख लोगों और हजारों गांवों को फायदा

सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से करीब 6,448 गांवों और लगभग 60 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है।

रेल संपर्क मजबूत होने का फायदा केवल ट्रेन यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

माल ढुलाई को मिलेगा बड़ा बूस्ट

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना भी है।

रेलवे के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त ट्रैक तैयार होने के बाद हर साल करीब 76 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित हो सकती है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न, कंटेनर और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

खास तौर पर बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

कौन-कौन से बड़े रेलवे केंद्र होंगे प्रभावित?

इस योजना के तहत खड़गपुर, भद्रक, कटक, पारादीप, हरिदासपुर और गुडूर जैसे महत्वपूर्ण रेल केंद्रों को फायदा मिलेगा।

पारादीप जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक रेल संपर्क मजबूत होने से आयात-निर्यात से जुड़ी माल ढुलाई को भी गति मिल सकती है। वहीं खड़गपुर और भद्रक जैसे व्यस्त जंक्शन पर अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेन संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य

इन चारों परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹9,450 करोड़ है। सरकार ने इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

परियोजनाएं पूरी होने के बाद पूर्वी तट के इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इसका सीधा फायदा यात्री ट्रेनों के संचालन के साथ-साथ देश की माल ढुलाई व्यवस्था को भी मिल सकता है।

कुल मिलाकर, 410 किलोमीटर के नए ट्रैक और हजारों करोड़ रुपये के निवेश वाली यह योजना पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को भी नई गति देने की कोशिश है।

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