शराब में डूब चुकी आप अब बनने चली सनातनी !
दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी एक बार फिर अपने बदले हुए राजनीतिक संदेश के साथ सामने आने की कोशिश कर रही है। मंदिरों में दर्शन, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और सनातन की बात—पार्टी की नई राजनीतिक भाषा पहले से अलग दिखाई देती है। लेकिन सवाल है कि क्या यह वैचारिक परिवर्तन है या राजनीतिक मजबूरी?

शराब में डूब चुकी आप अब बनने चली सनातनी !
दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी एक बार फिर अपने बदले हुए राजनीतिक संदेश के साथ सामने आने की कोशिश कर रही है। मंदिरों में दर्शन, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और सनातन की बात—पार्टी की नई राजनीतिक भाषा पहले से अलग दिखाई देती है। लेकिन सवाल है कि क्या यह वैचारिक परिवर्तन है या राजनीतिक मजबूरी?
वैसे तो आम आदमी पार्टी लंबे समय तक खुद को ऐसी राजनीति से अलग बताती रही, जिसमें धर्म प्रमुख मुद्दा हो। यही वजह है कि आज जब पार्टी खुद को सनातन के करीब दिखाने की कोशिश कर रही है, तो उसके नेताओं के पुराने बयान फिर चर्चा में आ गए हैं।
इन्हीं बयानों में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का वह बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कहा था— "मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम।" इस तरह के बयान सनातन का सीधा-सीधा अपमान करते हैं, जबकि पार्टी ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
इसी प्रकार, अरविंद केजरीवाल का वह पुराना बयान भी अक्सर राजनीतिक बहस में उद्धृत किया जाता है, जिसमें उन्होंने अपनी नानी का जिक्र करते हुए कहा था कि "मेरे राम मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाकर खुश नहीं हो सकते।वही केजरीवाल अब राम मंदिर के दर्शन करने अयोध्या पहुँच रहे हैं।
इन बयानों के कारण आम आदमी पार्टी पर समय-समय पर हिंदू आस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि जब आज पार्टी सनातन की बात करती है, तो उसके विरोधी पूछते हैं कि क्या पार्टी ने अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार किया है या यह केवल बदलते राजनीतिक माहौल का असर है।
इस पूरे घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी की हालिया राजनीतिक चुनौतियों से भी जोड़कर देखता है। कथित शराब नीति घोटाले के बाद पार्टी की साख को बड़ा नुकसान पहुंचा और दिल्ली की सत्ता भी उसके हाथ से निकल गई। सत्ता से बाहर होने के बाद आम आदमी पार्टी अब अपनी राजनीतिक छवि बदलने की कोशिश कर रही है। पहले जिन मुद्दों से पार्टी दूरी बनाकर चलती थी, आज उन्हीं सनातन और धार्मिक प्रतीकों को प्रमुखता से सामने रखा जा रहा है। इसी कारण विपक्ष इसे वैचारिक परिवर्तन नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति बता रहा है।
हालांकि, आम आदमी पार्टी का पक्ष यह रहा है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती है और उसकी राजनीति विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनकल्याण पर केंद्रित रही है। पार्टी अपने ऊपर लगाए गए राजनीतिक आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
आखिरकार, यह निर्णय जनता को करना है कि आम आदमी पार्टी का वर्तमान रुख उसके विचारों में वास्तविक परिवर्तन का संकेत है या फिर बदलते राजनीतिक हालात के अनुरूप बनाई गई नई रणनीति। लोकतंत्र में मतदाता केवल वर्तमान भाषण नहीं, बल्कि नेताओं के पुराने बयान, राजनीतिक रिकॉर्ड और वर्तमान आचरण—तीनों को देखकर अपना फैसला करते हैं।
