सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा पर सख्ती की मांग, सुप्रीम कोर्ट कम्युनिटी सर्विस वाली याचिका पर करेगा सुनवाई
सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं के खिलाफ एफआईआर की जगह सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) का विकल्प अपनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अदालत ने मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए बुधवार को विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है।

सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
देश में सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा, आपत्तिजनक टिप्पणियों और ऑनलाइन व्यवहार को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में भी बहस शुरू हो गई है। शीर्ष अदालत के सामने एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि ऐसे मामलों में युवाओं के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें एक निश्चित अवधि तक कम्युनिटी सर्विस (सामुदायिक सेवा) करने का अवसर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई है। अदालत अब इस विषय पर विस्तार से पक्षकारों की दलीलें सुनेगी।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर कई युवा बिना परिणामों को समझे भावनाओं में बहकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर देते हैं। ऐसे मामलों में हर बार आपराधिक मामला दर्ज करना ही एकमात्र समाधान नहीं होना चाहिए।
याचिकाकर्ता का सुझाव है कि पहली बार इस तरह की गलती करने वाले युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराने के लिए उन्हें एक सप्ताह या निर्धारित अवधि तक सामुदायिक सेवा करने का अवसर दिया जाए। उनका मानना है कि इससे युवाओं में अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
संसद मार्च का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान वकील ने 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि ऐसे आयोजनों में शामिल कुछ लोगों के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट माहौल को शांत करने के बजाय और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बड़े आयोजनों के आयोजकों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को सुनने पर सहमति जताई। अदालत ने कहा कि इस विषय पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी और सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अंतिम राय नहीं दी है। अदालत केवल यह तय कर रही है कि क्या इस विषय पर कोई व्यापक दिशा-निर्देश या वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा सकती है।
एफआईआर बनाम कम्युनिटी सर्विस की बहस
यह मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस सवाल को भी सामने लाता है कि पहली बार गलती करने वाले युवाओं के साथ कानूनी व्यवस्था का रवैया कैसा होना चाहिए।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हर मामले में आपराधिक कार्रवाई जरूरी नहीं होती। वहीं दूसरी ओर कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन अभद्र भाषा और नफरत फैलाने वाले संदेशों पर सख्ती भी उतनी ही जरूरी है ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा मिल सके।
इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनेगा।
बुधवार को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि क्या सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा से जुड़े मामलों में कम्युनिटी सर्विस जैसी व्यवस्था कानूनी रूप से लागू की जा सकती है या नहीं।
इस मामले का फैसला भविष्य में सोशल मीडिया से जुड़े मामलों और युवाओं के प्रति कानूनी दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
