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उत्तराखंड के युवक ने बना डाली Electric Flying Car, पहली टेस्ट फ्लाइट ने मचाई सनसनी

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के काफलीखान गांव के युवा इनोवेटर रवि तम्ता ने सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है। HAPIDA SKYNeX नाम के इस प्रोटोटाइप को ड्रोन तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है और इसका टेस्ट फ्लाइट भी किया गया। पहाड़ी इलाकों में सड़क से लंबी दूरी तय करने में लगने वाले समय को कम करना इस तरह की तकनीक का संभावित उद्देश्य बताया जा रहा है।

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उत्तराखंड के युवक ने बना डाली Electric Flying Car, पहली टेस्ट फ्लाइट ने मचाई सनसनी

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के एक युवा इनोवेटर ने ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अल्मोड़ा के काफलीखान गांव के रहने वाले रवि तम्ता ने एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल विकसित किया है, जिसे उन्होंने HAPIDA SKYNeX Prototype नाम दिया है। इस व्हीकल की टेस्ट फ्लाइट भी की गई है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

ड्रोन तकनीक पर आधारित है प्रोटोटाइप

रवि तम्ता का यह फ्लाइंग व्हीकल पारंपरिक कार से काफी अलग है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे ड्रोन तकनीक को संशोधित और बेहतर बनाकर तैयार किया गया है। यह फिलहाल एक सिंगल-सीटर प्रोटोटाइप है और इसे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फ्लाइंग कार नहीं माना जाना चाहिए।

अल्मोड़ा के खुले मैदान में इसके प्रदर्शन के दौरान व्हीकल को हवा में उड़ते हुए देखा गया। इस टेस्ट ने पहाड़ी क्षेत्रों में भविष्य की वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

40 किलोमीटर की यात्रा सिर्फ 10 मिनट में?

इस तकनीक को विकसित करने के पीछे पहाड़ी इलाकों में यात्रा की समस्या को कम करना एक संभावित उद्देश्य बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र में करीब 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा में 90 मिनट तक लग सकते हैं, जबकि हवा के रास्ते यही दूरी लगभग 10 मिनट में तय करने की संभावना बताई गई है।

हालांकि, यह आंकड़ा मौजूदा प्रोटोटाइप की व्यावसायिक सेवा का प्रमाण नहीं है। वास्तविक इस्तेमाल से पहले तकनीक को सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय मंजूरियों की कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

फ्लाइंग व्हीकल की टेस्ट फ्लाइट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या भारत के पहाड़ी इलाकों में भविष्य में इस तरह के इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

इस प्रोजेक्ट ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि इसे किसी बड़े विमान निर्माता की जगह एक स्थानीय युवा इनोवेटर ने विकसित किया है।

क्या यह सच में 'Flying Car' है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। HAPIDA SKYNeX फिलहाल एक फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है। इसे सड़क पर चलने वाली ऐसी कार के रूप में नहीं बताया गया है जो सामान्य कार की तरह सड़क पर चल सके और जरूरत पड़ने पर उड़ सके।

इसलिए इसे फिलहाल एक इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल या ड्रोन-आधारित फ्लाइंग प्रोटोटाइप कहना अधिक सटीक होगा।

पहाड़ी परिवहन में बदल सकता है तस्वीर?

अगर भविष्य में ऐसी तकनीक सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती तरीके से विकसित होती है, तो पहाड़ी इलाकों में इसका इस्तेमाल काफी उपयोगी हो सकता है। दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, मेडिकल इमरजेंसी और कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने जैसी जरूरतों में एयर मोबिलिटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल रवि तम्ता का प्रोटोटाइप शुरुआती चरण में है। लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ्लाइट ने यह जरूर दिखाया है कि भारत के छोटे शहरों और गांवों से भी नए एविएशन इनोवेशन सामने आ रहे हैं।

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