राजनीति

विजय की सर्वदलीय बैठक के बाद तमिलनाडु के नेताओं का बड़ा ऐलान, परिसीमन के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प

मिलनाडु में परिसीमन के प्रस्तावित बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में करीब 21 लोकसभा और राज्यसभा सांसद शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। नेताओं ने तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने वाले किसी भी बदलाव का विरोध करने और परिसीमन के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प लिया।

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परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु के नेता एकजुट, विजय की सर्वदलीय बैठक में बनी रणनीति

नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर राजनीतिक विरोध तेज होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री विजय की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व को बनाए रखने पर जोर दिया गया। बैठक में कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML समेत विभिन्न दलों के करीब 21 लोकसभा और राज्यसभा सांसद शामिल हुए।

बैठक के दौरान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से तमिलनाडु के संसद में प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। सभी शामिल नेताओं ने ऐसे किसी भी बदलाव का विरोध करने और राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने पर सहमति जताई।

संसद में 39 सीटें बनाए रखने की मांग

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु का संसदीय प्रतिनिधित्व किसी भी स्थिति में कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में कुल 543 सीटों की मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखा जाए और तमिलनाडु के लिए 39 सीटों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने परिसीमन को केवल राजनीतिक दलों का मुद्दा न बताते हुए इसे तमिलनाडु के अधिकार और संसद में उसकी आवाज से जुड़ा विषय बताया। उनके मुताबिक जनसंख्या या किसी अन्य अनुपात के आधार पर सीटों में बदलाव तमिलनाडु की भूमिका को कमजोर कर सकता है।

'पार्टी राजनीति से ऊपर है मुद्दा'

बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि परिसीमन का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने भी परिसीमन को तमिलनाडु और देश दोनों के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसका विरोध करने की बात कही।

नेताओं का कहना है कि यदि राज्य की सीटों में बदलाव किया गया तो संसद में तमिलनाडु की राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है। इसलिए सभी दलों से इस मुद्दे पर एक साथ आने की अपील की गई।

DMK और AIADMK की गैरमौजूदगी पर सवाल

हालांकि बैठक में तमिलनाडु की प्रमुख पार्टियां DMK और AIADMK शामिल नहीं हुईं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल 57 सांसदों में से बड़ी संख्या ने बैठक से दूरी बनाई। DMK के सभी 30 सांसद और AIADMK के चार सांसद बैठक में मौजूद नहीं थे।

कांग्रेस नेताओं ने दोनों दलों की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु के संसदीय अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को एक साथ खड़ा होना चाहिए।

आगे भी जारी रह सकता है विरोध

बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगामी मानसून सत्र में फिर से पेश किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में तमिलनाडु के नेताओं की यह बैठक इस मुद्दे पर राज्य में आगे की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक में शामिल नेताओं ने साफ संकेत दिया कि तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व में किसी भी तरह की कमी को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ राजनीतिक स्तर पर एकजुट होकर विरोध किया जाएगा।

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