वंदे मातरम् और 'दिमागी नक्सल' पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए भाषण में युवाओं और Gen Z पर खास फोकस रहा। वहीं 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी और कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया। पीएम मोदी ने युवाओं के लिए AI स्किलिंग, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और 2036 ओलंपिक को लेकर कई बड़े लक्ष्य सामने रखे।

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देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से करीब 75 मिनट का संबोधन दिया। इस बार उनके भाषण में युवाओं की भूमिका पर खास जोर दिखाई दिया।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में युवा, नौजवान, साथी और युवा शक्ति जैसे शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किया और युवाओं से देश के विकास में नेतृत्व की भूमिका निभाने की अपील की।

युवाओं के लिए पीएम मोदी की बड़ी घोषणाएं

प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए डिजिटल माध्यम से मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की। उनका कहना था कि महंगी कोचिंग गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव डालती है।

सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शिक्षकों की मदद से छात्रों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाने की दिशा में काम करेगी।

इसके अलावा सरकार ने अगले एक साल में करीब एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है।

खेल के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। भारत का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा खेल स्पर्धाओं में मजबूत भागीदारी दर्ज कराना और देश को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

'दिमागी नक्सल' बयान पर विपक्ष का पलटवार

अपने भाषण में पीएम मोदी ने नक्सलवाद को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अब एक अलग तरह की वैचारिक चुनौती सामने है, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' कहा।

प्रधानमंत्री ने ऐसे तत्वों से सतर्क रहने की बात कही और समाज में उनके प्रभाव को लेकर चिंता जताई।

पीएम मोदी के इस बयान के बाद विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार पहले अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' कहती थी और अब 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस बयान को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

वंदे मातरम् पर भी बढ़ा विवाद

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए।

बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन पर आपत्ति जताई। बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर कांग्रेस से जवाब और माफी की मांग की गई।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बातचीत को लेकर सवाल उठाए और इसे वंदे मातरम् विवाद से जोड़ दिया।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। पार्टी की ओर से कहा गया कि वंदे मातरम् के गायन को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी।

कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा गीत को रोकने के लिए नहीं बल्कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बैठने की व्यवस्था को लेकर था, क्योंकि खरगे काफी समय से खड़े थे।

इस तरह एक कार्यक्रम के वीडियो को लेकर दोनों दलों की अलग-अलग व्याख्या सामने आई है। बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों को गलत और भ्रामक बता रही है।

राहुल गांधी और खरगे रहे अनुपस्थित

लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के मौजूद नहीं रहने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई।

विपक्ष और सरकार के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक मतभेदों के बीच स्वतंत्रता दिवस के दिन सामने आए ये मुद्दे सियासी बहस का नया केंद्र बन गए।

दुनिया के नेताओं ने दी भारत को बधाई

भारत के स्वतंत्रता दिवस पर कई देशों के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता को शुभकामनाएं दीं।

रूस, अमेरिका, इजरायल और फ्रांस समेत कई देशों ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की बात कही। बधाई संदेशों में भारत की आर्थिक, तकनीकी, वैज्ञानिक और रणनीतिक प्रगति का भी उल्लेख किया गया।

कुल मिलाकर 15 अगस्त 2026 का दिन राजनीतिक और राष्ट्रीय दोनों ही दृष्टि से काफी चर्चा में रहा। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं और तकनीकी कौशल को भारत के भविष्य की ताकत बताया, तो दूसरी तरफ 'दिमागी नक्सल' और वंदे मातरम् जैसे मुद्दों ने सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव को और बढ़ा दिया।

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