वंदे मातरम् विवाद: कांग्रेस के ‘दो छंद’ वाले रुख पर BJP का हमला, कैसे बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने पार्टी कार्यक्रमों में केवल पहले दो छंद गाने की अपनी पुरानी नीति दोहराई है, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे से जोड़कर कांग्रेस पर हमला बोल रही है।

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वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद ही गाने की परंपरा को जारी रखेगी। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला शुरू कर दिया है।

क्या है कांग्रेस का रुख?

कांग्रेस का कहना है कि वह 1937 में अपनाए गए अपने ऐतिहासिक रुख का पालन कर रही है। उस समय पार्टी ने महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के सुझावों के बाद वंदे मातरम् के पहले दो छंदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त माना था।

हालिया बैठक में भी कांग्रेस ने इसी परंपरा को जारी रखने का फैसला किया। पार्टी का तर्क है कि यह कोई नया निर्णय नहीं बल्कि दशकों पुरानी नीति का पालन है।

BJP ने कैसे बनाया बड़ा मुद्दा?

बीजेपी ने कांग्रेस के इस रुख को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए आक्रामक अभियान शुरू किया है। गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् का "अपमान" करने का आरोप लगाया है। अमित शाह ने इसे "देश विरोधी फैसला" तक बताया और कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी 1937 के फैसले को ढाल बनाकर राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ खड़ी दिखाई दे रही है।

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में हुए एक कार्यक्रम के बाद और तेज हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने वंदे मातरम् के दौरान उचित सम्मान नहीं दिखाया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो की गलत व्याख्या की जा रही है।

कांग्रेस का पलटवार

बीजेपी के हमलों के जवाब में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और कांग्रेस का उससे ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेताओं ने बीजेपी पर राष्ट्रीय प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है।

क्यों अहम है यह मुद्दा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वंदे मातरम् का मुद्दा सिर्फ एक गीत तक सीमित नहीं है। बीजेपी इसे राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने ऐतिहासिक रुख और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का हवाला दे रही है। ऐसे में यह विवाद आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

फिलहाल वंदे मातरम् को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।

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