राजनीति

आखिर NEET के बीच में ग्रेट निकोबार कहां से आ गया?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन चल रहा था। मुद्दा था NEET, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग। इसी मंच से UPSC टीचर विजेंद्र चौहान ने भाषण दिया।

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आखिर NEET के बीच में ग्रेट निकोबार कहां से आ गया?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन चल रहा था। मुद्दा था NEET, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग। इसी मंच से UPSC टीचर विजेंद्र चौहान ने भाषण दिया।

लेकिन उनके भाषण में एक ऐसा मुद्दा आया जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने सिर्फ NEET की बात नहीं की, बल्कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि असली लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं है, बल्कि "State" की नीतियों की है। भाषण में उन्होंने यहां तक कहा कि "शत्रु दिखाई नहीं देगा... शत्रु पूरा निकोबार चाहता है।"

यहीं से सवाल खड़ा हो गया।

अगर प्रदर्शन NEET और छात्रों के भविष्य को लेकर था, तो अचानक ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बीच में क्यों आ गया? आखिर छात्रों की परीक्षा और निकोबार का क्या कनेक्शन है?

दरअसल, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का कुछ पर्यावरण संगठन और एक्टिविस्ट लंबे समय से विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण और स्थानीय जनजातियों पर असर पड़ेगा। दूसरी तरफ सरकार इसे देश के लिए बेहद अहम रणनीतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मानती है।

ऐसे में अब यही आरोप लगा रहे हैं कि CJP के इस प्रदर्शन में शिक्षा के मुद्दे के साथ-साथ देश विरोधी मुद्दों को भी जोड़ा जा रहा है ! प्रदर्शन को देख रहे लोगो का कहना है कि जब छात्र NEET और पेपर लीक पर इंसाफ मांग रहे हैं, तब मंच से निकोबार जैसे मुद्दे उठाना आंदोलन के असली मकसद को दिखा रहा है जिसमे छात्रों का हित नहीं बल्कि देश विरोधी ताकतों का समर्थन छिपा हुआ है। शायद यही वजह है कि सोशल मीडिया पर सैलाब बनकर शुरू हुआ ये मुद्दा अब चंद लाइक्स और रील्स तक सीमित रह गया है अब फैसला जनता को करना है कि यह सिर्फ एक छात्र आंदोलन है या फिर इसे एक बड़े देश विरोधी नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश हो रही है।

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